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स्ट्रोक के चेतावनी संकेत: BE-FAST को पहचानें और 60 मिनट...

डॉ. ऋत्विज बिहारी द्वारा

स्ट्रोक जागरूकता — BE-FAST संकेत, डॉ. ऋत्विज बिहारी, न्यूरोलॉजिस्ट लखनऊ
एआई सारांश
  • स्ट्रोक भारत में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण और विकलांगता का प्रमुख कारण है। यह एक चिकित्सीय आपातकाल है — बड़े नसों वाले स्ट्रोक के हर मिनट के बिना उपचार के लगभग 19 लाख (1.9 million) न्यूरॉन्स नष्ट हो जाते हैं।
  • BE-FAST संकेत (Balance, Eyes, Face, Arms, Speech, Time) स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने का सबसे व्यापक उपकरण है। इनमें से किसी भी लक्षण के अचानक आने पर — चाहे वे हल्के लगें — तुरंत 112 पर कॉल करना अनिवार्य है।
  • थक्का-घोलने वाला उपचार (IV thrombolysis) लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के भीतर दिया जाना चाहिए। यही कारण है कि लक्षणों को पहचानते ही आपातकालीन सेवाओं को कॉल करना गैर-परक्राम्य है।

प्रस्तावना: वह आपातकाल जो किसी का इंतजार नहीं करता

लखनऊ में न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में अपने वर्षों के अभ्यास में, जो मामले मुझे सबसे लंबे समय तक याद रहते हैं वे जटिल निदान या दुर्लभ स्थितियाँ नहीं हैं — वे स्ट्रोक के मरीज़ हैं जो बहुत देर से पहुंचे। ऐसे मरीज़ जिनके परिवारों ने इंतजार किया, उम्मीद करते हुए कि लक्षण अपने आप ठीक हो जाएंगे। जो मरीज़ स्ट्रोक शुरू होने के 6, 8, या 12 घंटे बाद अस्पताल पहुंचे — प्रभावी उपचार की उनकी खिड़की कब की बंद हो चुकी थी।

और फिर वे मरीज़ हैं जो 90 मिनट के भीतर पहुंचे — जिन्हें समय पर उपचार मिला और जो अस्पताल से चलकर घर गए। मैंने दोनों वास्तविकताएं देखी हैं, और मैं आपको पूरे विश्वास के साथ बता सकता हूँ: इन दो परिणामों के बीच का अंतर लगभग हमेशा यह होता है कि परिवार ने चेतावनी के संकेतों को कितनी जल्दी पहचाना और कार्रवाई की।

यह ब्लॉग उस अंतर को पाटने के लिए लिखा गया है।

स्ट्रोक क्या है?

स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति अचानक बंद हो जाती है। दो मुख्य प्रकार हैं:

  • इस्केमिक स्ट्रोक (Ischaemic Stroke) — 80-85% मामले: एक रक्त का थक्का (clot) मस्तिष्क को रक्त आपूर्ति करने वाली धमनी को अवरुद्ध करता है। यही प्रकार थक्का-घोलने वाली थेरेपी के लिए उपयुक्त है।
  • हैमरेजिक स्ट्रोक (Haemorrhagic Stroke) — 15-20% मामले: मस्तिष्क में एक रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे मस्तिष्क में या उसके आसपास रक्तस्राव होता है।

प्रकार चाहे जो भी हो, परिणाम एक ही है: ऑक्सीजन से वंचित मस्तिष्क कोशिकाएं मिनटों में मरने लगती हैं। एक बड़े नसों वाले इस्केमिक स्ट्रोक के लिए, बिना उपचार के प्रति मिनट लगभग 19 लाख (1.9 million) न्यूरॉन्स नष्ट हो जाते हैं। यही जैविक वास्तविकता उस सिद्धांत को जन्म देती है: समय ही मस्तिष्क है (Time is Brain)। यदि आपके परिवार में उच्च रक्तचाप, एट्रियल फाइब्रिलेशन, या मधुमेह है, तो कृपया हमारे स्ट्रोक रोकथाम और प्रबंधन कार्यक्रम के बारे में पढ़ें।

स्ट्रोक को पहचानें: BE-FAST संकेत

चिकित्सा समुदाय ने हाल ही में क्लासिक FAST संकेत को BE-FAST में अपडेट किया है, जिसमें दो महत्वपूर्ण लक्षण जोड़े गए हैं जो पुराने संस्करण में नहीं थे। कृपया इसे याद करें:

B — Balance (संतुलन): अचानक संतुलन या समन्वय खोना

अचानक चलने में असमर्थता, गंभीर चक्कर आना, या समन्वय (coordination) का खोना — विशेष रूप से जब यह अचानक और बिना किसी चेतावनी के आए — स्ट्रोक का एक प्रमुख चेतावनी संकेत है। कई मरीज़ कहते हैं कि अचानक ऐसा महसूस हुआ जैसे वे "नशे में" हैं या फर्श उनके नीचे झुक रही है। यह लक्षण अकेला भी, अगर अचानक और गंभीर हो, आपातकालीन कॉल का कारण है।

E — Eyes (आँखें): अचानक दृष्टि में बदलाव

एक या दोनों आँखों में अचानक धुंधलापन, एक आँख में अचानक पूरी तरह दृष्टि खो जाना (अक्सर "पर्दा गिरने" जैसा वर्णित), या दोहरी दृष्टि (diplopia) — ये सभी क्लासिक स्ट्रोक लक्षण हैं जिन्हें अक्सर आँखों की थकान समझ लिया जाता है।

F — Face (चेहरा): चेहरे का एक तरफ लटकना

व्यक्ति से मुस्कुराने को कहें। क्या चेहरे का एक हिस्सा लटक रहा है या असमान दिखता है? चेहरे की कमजोरी — मुंह का एक कोना नीचे खिंचना, एक पलक पूरी तरह न खुलना, या चेहरे के एक तरफ सुन्नपन — स्ट्रोक के सबसे पहचानने योग्य संकेतों में से एक है।

A — Arms (भुजाएँ): भुजा की कमजोरी

व्यक्ति को दोनों भुजाएँ सामने की ओर हथेलियाँ ऊपर करके सीधी फैलाने और 10 सेकंड तक रोकने को कहें। यदि एक भुजा नीचे गिरती है, या उठाई ही नहीं जा सकती, तो यह एक मजबूत सकारात्मक संकेत है। एक भुजा — या एक टांग — में अचानक कमजोरी या सुन्नपन जो बिना किसी शारीरिक कारण के आए, स्ट्रोक की पहचान है।

S — Speech (बोलना): अस्पष्ट या भ्रमित भाषण

व्यक्ति से एक सरल वाक्य दोहराने को कहें: "आसमान नीला है।" क्या उनका भाषण अस्पष्ट (slurred) है? क्या वे शब्द खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं? क्या वे ऐसे शब्द कह रहे हैं जो समझ में नहीं आते? ये सभी पैटर्न स्ट्रोक के कारण भाषा में विभिन्न प्रकार के व्यवधान (aphasia) को दर्शाते हैं।

T — Time (समय): तुरंत आपातकालीन सेवाएं बुलाएं

यदि उपरोक्त में से कोई भी लक्षण मौजूद हो — चाहे हल्का हो, चाहे बेहतर होता दिख रहा हो — तुरंत 112 पर कॉल करें। मरीज को खुद गाड़ी में न ले जाएं जब तक बिल्कुल कोई विकल्प न हो। देखते न रहें कि लक्षण सुधरते हैं या नहीं। मरीज को खाना, पानी या दवाई न दें। आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें, लक्षण शुरू होने का सटीक समय नोट करें, और तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं।

उपचार की महत्वपूर्ण समय-सीमा: हर मिनट क्यों मायने रखता है

इस्केमिक स्ट्रोक का प्राथमिक उपचार है IV थ्रोम्बोलिसिस (IV thrombolysis) — tPA (tissue Plasminogen Activator) नामक थक्का-घोलने वाली दवा का अंतःशिरा इंजेक्शन। यह दवा थक्के को घोल सकती है और प्रभावित मस्तिष्क ऊतक में रक्त प्रवाह बहाल कर सकती है। हालांकि, इसकी एक सख्त समय-सीमा है: यह लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के भीतर दी जानी चाहिए।

बड़े नसों के अवरोध के लिए, मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी — एक प्रक्रिया जहाँ एक कैथेटर मस्तिष्क की धमनी के अंदर से थक्के को शारीरिक रूप से निकालने के लिए उपयोग किया जाता है — चुने हुए मरीजों में लक्षण शुरू होने के 24 घंटे तक की जा सकती है।

इन समय-सीमाओं का व्यावहारिक निहितार्थ स्पष्ट है: जो मरीज लक्षण शुरू होने के 30 मिनट के भीतर आपातकालीन सेवाओं को कॉल करता है उसे उपचार मिलने और अच्छे से ठीक होने की बहुत अधिक संभावना है। जो मरीज 5 घंटे बाद अस्पताल पहुंचता है वह थ्रोम्बोलिसिस की खिड़की पूरी तरह चूक चुका हो सकता है।

विशेष चेतावनी: TIA (मिनी-स्ट्रोक)

एक TIA (Transient Ischaemic Attack), जिसे कभी-कभी "मिनी-स्ट्रोक" कहा जाता है, एक जैसे BE-FAST लक्षण पैदा करता है लेकिन मिनटों से घंटों में पूरी तरह ठीक हो जाता है। मरीज और परिवार अक्सर खुद को आश्वस्त करते हैं कि चूंकि लक्षण "अपने आप चले गए", इसलिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं। यह सबसे खतरनाक भ्रांतियों में से एक है।

TIA एक चिकित्सीय आपातकाल है। TIA के 48 घंटों के भीतर बड़े स्ट्रोक का जोखिम 5 से 10% के बीच है। ठीक हो गया TIA राहत नहीं — यह एक जरूरी अलार्म है।

नियंत्रण योग्य जोखिम कारक

स्ट्रोक के सबसे शक्तिशाली जोखिम कारक — अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (BP), अनियंत्रित मधुमेह, एट्रियल फाइब्रिलेशन, धूम्रपान, और मोटापा — सभी परिवर्तनीय हैं। अगर आपको उच्च रक्तचाप का निदान हुआ है: अपनी दवा लगातार लें, घर पर अपना BP नापते रहें, और नियमित फॉलो-अप करें। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप भारत में स्ट्रोक का सबसे बड़ा रोकथाम योग्य कारण है।

निष्कर्ष

स्ट्रोक वह आपातकाल है जहाँ जन जागरूकता सीधे जीवन बचाती है। दवाएं काम करती हैं — जब मरीज समय पर आते हैं तो हमारे पास स्ट्रोक को उलटने के अत्यधिक प्रभावी उपकरण हैं। लेकिन ये उपकरण बेकार हैं यदि परिवार यह नहीं पहचान पाता कि क्या हो रहा है। BE-FAST को याद रखें। इन लक्षणों को देखते ही 112 पर कॉल करें। और यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को स्ट्रोक के जोखिम कारक हैं, तो एक निवारक न्यूरोलॉजी परामर्श बुक करें — अपने संवहनी जोखिम कारकों का सक्रिय प्रबंधन सबसे शक्तिशाली स्ट्रोक रोकथाम रणनीति है।