स्ट्रोक vs हार्ट अटैक — इन दोनों के बीच का अंतर समझें
डॉ. ऋत्विज बिहारी द्वारा

- जबकि दोनों संवहनी (vascular) आपात स्थिति हैं, एक दिल का दौरा हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि एक स्ट्रोक मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट कर देता है।
- स्ट्रोक में अचानक न्यूरोलॉजिकल कार्यक्षमता (F.A.S.T. संकेत) का नुकसान होता है, जबकि दिल के दौरे में सीने में दर्द होता है।
- दोनों के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है; बर्बाद हुए हर मिनट के परिणामस्वरूप अपरिवर्तनीय क्षति होती है।
दो जानलेवा आपातकालीन स्थितियां
स्ट्रोक और हार्ट अटैक दोनों ही रक्त के प्रवाह में रुकावट से होने वाली जानलेवा आपातकालीन स्थितियां हैं। हालांकि, ये शरीर के बिल्कुल अलग अंगों को प्रभावित करते हैं और इनके लक्षण भी अलग होते हैं।
हार्ट अटैक (दिल का दौरा) क्या है?
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, आमतौर पर रक्त के थक्के द्वारा। ऑक्सीजन की कमी के कारण, हृदय की मांसपेशियां मरने लगती हैं।
- सीने में दर्द या भारीपन: सीने के बीच या बाईं ओर दबाव महसूस होना।
- फैलता हुआ दर्द: जो हाथ (विशेषकर बाएं हाथ), पीठ, गर्दन, या जबड़े तक जाए।
- सांस फूलना और पसीना आना।
ब्रेन स्ट्रोक (ब्रेन अटैक / लकवा) क्या है?
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है (Ischemic stroke), या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है (Hemorrhagic stroke)। ऑक्सीजन के बिना मस्तिष्क की कोशिकाएं मिनटों में मरने लगती हैं। लखनऊ के सर्वश्रेष्ठ स्ट्रोक विशेषज्ञ (Stroke Specialist) मानते हैं कि "Time is Brain" अर्थात् हर पल कीमती है।
स्ट्रोक के संकेत: याद रखें F.A.S.T.
हार्ट अटैक के विपरीत, स्ट्रोक मुख्य रूप से न्यूरोलॉजिकल है। लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है।
- Face (चेहरा): क्या चेहरे का एक हिस्सा लटक रहा है या सुन्न महसूस हो रहा है? लकवा मार गया है?
- Arms (भुजाएं): क्या एक हाथ कमजोर या सुन्न हो गया है?
- Speech (बोलना): क्या मरीज की बोली लड़खड़ा रही है? क्या उसे समझने में दिक्कत हो रही है?
- Time (समय): अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं।
अंतर समझना क्यों जरूरी है
हार्ट अटैक का इलाज कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है, जबकि स्ट्रोक का इलाज न्यूरोलॉजिस्ट (स्ट्रोक विशेषज्ञ) करते हैं। अगर स्ट्रोक का संदेह है, तो मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाना चाहिए जहां स्ट्रोक यूनिट हो। डॉ. ऋत्विज बिहारी थ्रोम्बोलिटिक थेरेपी (क्लॉट-बस्टिंग) देकर मरीज को बड़ी अक्षमता से बचा सकते हैं, बशर्ते मरीज 4.5 घंटे के गोल्डन विंडो के अंदर अस्पताल पहुंचे।
बचाव ही इलाज है
हार्ट अटैक और स्ट्रोक दोनों के जोखिम कारक समान हैं: हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, और डायबिटीज। अपनी जीवनशैली को नियंत्रित करके आप दोनों ही बीमारियों से बच सकते हैं।